(N/A) एल्डिहाइड और कीटोन की अमोनिया व्युत्पन्नों $(H_{2}N-Z)$ के साथ अभिक्रिया एक नाभिकरागी योग-विलोपन अभिक्रिया है।
$(1)$ क्रियाविधि:
अमोनिया और उसके व्युत्पन्न $(H_{2}N-Z)$ जैसे नाभिकरागी,एल्डिहाइड और कीटोन के कार्बोनिल समूह पर जुड़ते हैं। यह अभिक्रिया उत्क्रमणीय और अम्ल-उत्प्रेरित होती है। मध्यवर्ती के तीव्र निर्जलीकरण के कारण साम्यावस्था उत्पाद के निर्माण की ओर झुकती है।
सामान्य अभिक्रिया:
$>C=O + H_{2}N-Z \rightleftharpoons >C(OH)NHZ \xrightarrow{-H_{2}O} >C=N-Z$
$(2)$ अल्कोहल का योग:
एल्डिहाइड शुष्क $HCl$ गैस की उपस्थिति में मोनोहाइड्रिक अल्कोहल के एक अणु के साथ अभिक्रिया करके हेमीएसिटल बनाते हैं,जो अल्कोहल के दूसरे अणु के साथ अभिक्रिया करके एसिटल बनाते हैं।
$(3)$ चक्रीय कीटाल:
कीटोन शुष्क $HCl$ गैस की उपस्थिति में एथिलीन ग्लाइकॉल जैसे डाइहाइड्रिक अल्कोहल के साथ अभिक्रिया करके चक्रीय उत्पाद बनाते हैं जिन्हें एथिलीन ग्लाइकॉल कीटाल कहा जाता है।
$(4)$ जल-अपघटन:
एसिटल और कीटाल का जलीय खनिज अम्लों के साथ जल-अपघटन करने पर संगत एल्डिहाइड और कीटोन प्राप्त होते हैं।